Up scholarship News Update daily

उत्तीर्ण और अनुत्तीर्ण में फंसे बीटीसी के विद्यार्थी

 

जनपद के सैकड़ों विद्यार्थी उत्तीर्ण और अनुत्तीर्ण के असमंजस में फंसे हैं। कोरोना काल के दौरान बीटीसी के प्रथम सेमेस्टर में छात्र-छात्राओं को प्रमोट करके दूसरे सेमेस्टर में भेज दिया था। दूसरे सेमेस्टर में हुई परीक्षा में दो दर्जन से अधिक विद्यार्थियों की मार्कशीट पर अनुत्तीर्ण लिखा है। ऐसे में समाज कल्याण विभाग ने इनकी छात्रवृति भी रोक दी है।

बुलंदशहर, जेएनएन। जनपद के सैकड़ों विद्यार्थी उत्तीर्ण और अनुत्तीर्ण के असमंजस में फंसे हैं। कोरोना काल के दौरान बीटीसी के प्रथम सेमेस्टर में छात्र-छात्राओं को प्रमोट करके दूसरे सेमेस्टर में भेज दिया था। दूसरे सेमेस्टर में हुई परीक्षा में दो दर्जन से अधिक विद्यार्थियों की मार्कशीट पर अनुत्तीर्ण लिखा है। ऐसे में समाज कल्याण विभाग ने इनकी छात्रवृति भी रोक दी है।

एससी और ओबीसी के 152 छात्र-छात्राओं को प्रथम सेमेस्टर में बगैर परीक्षा के ही प्रमोट कर दिया गया था। दूसरे सेमेस्टर में आए विद्यार्थियों ने समाज कल्याण विभाग में छात्रवृति के लिए आवेदन किया। दूसरे सेमेस्टर में दो दर्जन विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हो गए। हालांकि इनमें से कुछ विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने बैक देकर परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसके बाद भी जारी किए गए रिजल्ट में उन्हें अनुत्तीर्ण दर्शा दिया गया है। ऐसे में समाज कल्याण विभाग ने भी इनकी छात्रवृति रोक दी है। ओबीसी और एससी के विद्यार्थियों की रूकी छात्रवृति से इनमें आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने मामले की शिकायत समाज कल्याण अधिकारी नागेंद्रपाल से की है। नागेंद्रपाल ने बताया कि विभाग द्वारा इनके डाटा का निरीक्षण किया गया है। ऐसे में उनकी मार्कशीट पर अनुत्तीर्ण लिखा होने के चलते छात्रवृति कैंसिल कर दी गई है।

बीए, एमए व एमकाम प्राइवेट परीक्षा फार्म की भरने की अंतिम तिथि 25 मार्च

डिबाई नगर में बीए, एमए एवं एमकॉम प्राइवेट के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा फार्म भरने की अंतिम तिथि 25 मार्च है। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए श्री राम इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट कालेज के प्राचार्य डा. अनुज कुमार ने बताया कि श्री राम इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट कालेज में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से सम्बद्व बीए, एमए एवं एमकाम व्यक्तिगत (प्राइवेट) परीक्षा फार्म 2020 – 21 भरने की अंतिम तिथि 25 मार्च है। इच्छुक छात्र एवं छात्राएं अपना परीक्षा फार्म विश्वविद्यालय वेब पोर्टल पर तुरंत ऑनलाइन कराएं। बीसीए व बीबीए की कल से संचालित होंगी कक्षा

बुलंदशहर के दिल्ली रोड स्थित ईश्वर दयाल परसंदी देवी महाविद्यालय बीसीए व बीबीए चतुर्थ व छठे सेमेस्टर की कक्षा सोमवार से संचालित होगी। प्रचार्य डा.टीएन मिश्रा ने बताया कि सोमवार से बीसीए व बीबीए द्वितीय तथा तृतीय वर्ष की चतुर्थ व छठे सेमेस्टर की कक्षा का संचालन शुरू किया जाएगा। सभी विद्यार्थी यूनिफोर्म में कोविड नियमों का पालन करते हुए कालेज में उपस्थित हो।

 

छात्रवृत्ति : जनपद के 14 शिक्षण संस्थानों को नोटिस

 

बुलंदशहर। छात्रवृत्ति फार्मों की जांच में जनपद के 14 शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। इन संस्थानों ने 170 अपात्र छात्रों के फार्म भरकर समाज कल्याण विभाग को फारवर्ड कर दिए, जबकि इन छात्र-छात्राओं की कॉलेजों द्वारा काउंसिलिंग नहीं हुई थी, इनके सीधे प्रवेश थे। मामले में विभागीय अधिकारी ने कॉलेज को नोटिस जारी कर दिए हैं। एसडीएम स्तर पर कॉलेजों की जांच होगी। विभाग ने एफआईआर दर्ज कराने की भी चेतावनी दी है।

शासन की ओर से शिक्षण संस्थानों में ग्रेजुएशन और प्रोफेशनल के अलावा बीएड व बीटीसी आदि कर रहे छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती है। जनपद में करीब 50 हजार से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष दिया जाता है। छात्रवृत्ति आवेदनों की जांच करने के बाद ही छात्रों का डाटा शासन में भेजा जाता है। अब जांच के दौरान 14 कॉलेजों के 170 छात्र ऐसे निकले हैं, जिन्हें कॉलेजों ने गलत तरीके से आवेदन करा दिया है। विभाग के अनुसार इन छात्रों के सीधे प्रवेश हैं और इनकी काउंसिलिंग नहीं हुई थी। ऐसे में यह छात्र छात्रवृत्ति के लिए पात्र नहीं हैं। कॉलेजों की मिलीभगत से इन छात्रों के फार्म विभाग तक पहुंचे हैं, जिस पर अब कार्रवाई करते हुए उक्त छात्रों के फार्म को निरस्त किया जा रहा है। मामले में जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा अब कॉलेजों को नोटिस जारी कर दिए हैं। बताया गया कि कॉलेजों से भी इन फार्मों की जांच करने के बाद इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। विभाग द्वारा ऐसे फार्मों की जांच की जा रही है। इसके बाद फिर और कार्रवाई होगी।

जनपद के 14 कॉलेजों को नोटिस जारी किए हैं। इन शिक्षण संस्थानों द्वारा अपात्र छात्रों के आवेदन भरवा दिए हैं, छात्र परेशान हो रहे हैं। उक्त छात्रों के पास काउंसिलिंग पत्र भी नहीं हैं। इसमें कॉलेजों की लापरवाही साफ नजर आ रही है। कॉलेजों के खिलाफ विधिक कार्रवाई भी होगी।
– नागेंद्र पाल सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी।

 

गत वर्षों में छात्रवृत्ति को आवेदन करने वालों की संख्या 55 हजार से अधिक होती थी, लेकिन इस बार आवेदन करने वालों की संख्या करीब 37 हजार है। इनमें से भी जिले से छात्रवृत्ति के लिए मात्र 20 हजार छात्र-छात्राओं का डाटा शासन के लिए फारवर्ड किया गया है। इस डाटा में वहीं शिक्षण संस्थान के छात्र-छात्राएं हैं, जिनकी जांच रिपोर्ट जिला समाज कल्याण विभाग को प्राप्त हो गई है और जांच अधिकारियों ने उन शिक्षण संस्थान को लेकर अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

 

छात्रवृत्ति से भारी संख्या में रह गए छात्र-छात्राएं वंचित

फतेहपुर। नवीं से स्नातक तक के 11548 छात्र-छात्राएं इस बार छात्रवृत्ति से वंचित रहेंगे। इनके आवेदनों में कमी मिली थी। अंतिम तिथि बीतने के बाद वेबसाइट भी बंद हो गई है। जिससे निका डाटा अब दुरुस्त नहीं हो सकेगा। जिले के 28468 छात्र-छात्राओं ने छात्रवृत्ति के लिए इस बार आवेदन किया था। इनमें 16911 आवेदन ही सही पाए गए हैं।

छात्र-छात्राओं ने छात्रवृत्ति का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। लखनऊ एनआईसी से आवेदनों की स्क्रुटनी हुई, जिसमेें 11548 आवेदनों में कमी मिलने पर इन्हें संदिग्ध माना गया। सही और संदिग्ध आवेदनों को समाज कल्याण विभाग के पास भेजा गया।

संदिग्ध डाटा सही करने के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी ने संस्थाओं से प्रत्यावेदन मांगे थे, लेकिन समय पर संशोधित डाटा उपलब्ध न कराने और वेबसाइट बंद होने के कारण 11548 छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति लटक गई है। अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को छोड़ कर बचे हुए शेष छात्र-छात्राओं को अगले साल भी छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिलेगा। वेबसाइट बंद होने की वजह से संशोधन करने का अंतिम समय भी खत्म हो गया है।

Download Amar Ujala App for Breaking News in Hindi & Live Updates. https://www.amarujala.com/channels/downloads?tm_source=text_share

मथुरा: 220 में से 140 शिक्षण संस्थाएं छात्रवृत्ति के अयोग्य

मथुरा। एसडीएम की जांच से छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल रहे शिक्षण संस्थाओं की परत दर परत साफ होती जा रही हैं। उनकी जांच में शामिल माननीयों और उनके चहेतों के विद्यालयों की भी पोल खुल रही है। मात्र एक पखवाड़े में ही 220 विद्यालयों में से 140 विद्यालयों के खिलाफ रिपोर्ट दी है। उन्होंने साफ लिखा है कि यह विद्यालय छात्रवृत्ति पाने योग्य नहीं हैं।

जनपद में करीब 560 से अधिक तकनीकी कोर्स आदि संचालित करने वाली उच्च शिक्षण संस्थाएं हैं, जिनमें करीब 36 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को पढ़ता हुआ दिखाया गया है। इनमें से सरकारी शिक्षण संस्थानों के छात्रों को निकाल दें तो करीब 30 हजार छात्र निजी शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत बताए गए हैं। इन सबकी जांच की जिम्मेदारी सीडीओ की अध्यक्षता वाली एसडीएम की समिति की है। इस समिति ने अब तक 220 शिक्षण संस्थाओं की जांच पूरी कर ली है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार इनमें से 140 शिक्षण संस्था के खिलाफ एसडीएम ने रिपोर्ट दी है कि यह शिक्षण संस्थाएं छात्रवृत्ति के योग्य नहीं हैं। अभी अन्य शिक्षण संस्थाओं की जांच होनी बाकी है। एसडीएम की इस रिपोर्ट से अधिकारियों के होश उड़ गए हैं। उनको चिंता है कि यदि जांच में जरा सी गड़बड़ी हुई तो फिर से छात्रवृत्ति घोटाला हो सकता है। सीडीओ डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि वह प्रयास कर रहे हैं कि समय रहते सभी शिक्षण संस्थाओं की जांच हो जाए।

 

विकास भवन में छात्रवृत्ति के लिए हंगामा और हाथापाई

बुलंदशहर। छात्रवृत्ति के लिए सोमवार को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में जमकर हंगामा किया। इस दौरान अधिकारी और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच बात हाथापाई तक पहुंच गई। कार्यकर्ता छात्र छात्रवृत्ति आवेदन में संशोधन के लिए कार्यालय पहुंचे थे और इसी दौरान यह विवाद हो गया। इसके चलते सीडीओ को पुलिस भी बुलानी पड़ी। सीडीओ ने मामले में एफआईआर के निर्देश दिए हैं। कॉलेज की लापरवाही का निदेशालय को पत्र भेजा जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि हाथापाई अधिकारियों द्वारा की गई है।आईपी पीजी कॉलेज द्वितीय परिसर के कुछ छात्रों के छात्रवृत्ति आवेदन में संशोधन नहीं हो सका था। छात्र काफी समय से समाज कल्याण विभाग में आ रहे थे। अधिकारी के अनुसार फार्म भरने के साथ छात्रों को वेबसाइट पर लॉग इन कर अन्य सभी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। समय-समय पर इसके लिए विभाग ने सभी कॉलेजों को सूचित किया। सोमवार कॉलेज के छात्र एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ समाज कल्याण अधिकारी के दफ्तर पहुंचे और उन्होंने इस समस्या को रखा। वार्ता के बीच नोकझोंक शुरू हो गई और बात हाथापाई तक पहुंच गई। सूचना मिलते ही सीडीओ अभिषेक पांडेय भी मौके पर पहुंचे और पुलिस को बुला लिया। सीडीओ के कार्यालय में भी काफी देर तक वार्ता चली। सूचना मिलते ही भाजपा युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष दीपक दुल्हेरा भी सीडीओ कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने भी मामले को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन एबीवीपी कार्यकर्ता अपनी जिद पर अड़े रहे। समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि छात्रों के साथ कार्यकर्ता आए थे उन्होंने उनसे अभद्रता और अपशब्द कहे। वह जबरन दबाव बना रहे थे, मेरे साथ हाथापाई और धक्का-मुक्की कार्यकर्ताओं द्वारा की गई। वहीं, पुलिस ने किसी तरह कार्यकर्ताओं को शांत किया। करीब डेढ़ घंटे तक विकास भवन में अफरातफरी का माहौल रहा। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. टीएन मिश्रा भी वहां पहुंचे और उन्होंने अफसरों से वार्ता की। बताया गया कि कॉलेज द्वारा भी विभाग को छात्रों की समस्या के बारे में बताया था। वहीं, दूसरी ओर एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ओजेश गौड़ ने कहा कि समाज कल्याण अधिकारी ने कार्यकर्ताओं पर गलत आरोप लगाए हैं। कार्यकर्ता छात्रों की समस्या को लेकर आए थे, लेकिन छात्रों की समस्या पर गौर देने के बजाय के उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई और अभद्रता की। इस दौरान रजनीश, दिवेश, सुमित, करण, ऋषभ, विवेक, प्रशांत और दीपांशु आदि एबीवीपी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

सीडीओ ने दिए कार्रवाई के निर्देश

विकास भवन में हुए हंगामे के मामले को सीडीओ ने गंभीरता से लेते हुए समाज कल्याण अधिकारी को कार्रवाई के लिए कहा है। बताया गया कि हंगामा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। सीडीओ ने बताया कि कॉलेज द्वारा भी छात्रों के मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिस कारण छात्र परेशान हैं। मामले में कॉलेज के खिलाफ भी शासन को लिखा जाएगा।

छात्रों और उनके कुछ साथियों ने कार्यालय में आकर हंगामा किया है। उनके द्वारा सरकारी कार्य में बाधा डाली गई और अधिकारी से अभद्रता की है। मामले में कॉलेज की लापरवाही भी सामने आई है। कानूनी कार्रवाई के लिए समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। कॉलेज के खिलाफ भी शासन को लिखा जा रहा है। – अभिषेक पांडेय, मुख्य विकास अधिकारी।

दयाछपरा। पीएन इंटर कॉलेज दुबे छपरा के 1250 छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति विद्यालय प्रशासन व समाज कल्याण विभाग की आपसी खींचातानी में स्वीकृत नहीं हो पाया है। समाज कल्याण विभाग और विद्यालय प्रशासन एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

बताया जाता है कि छात्रवृत्ति का आवेदन पत्र कॉलेज द्वारा 4 मार्च से 8 मार्च के बीच समाज कल्याण विभाग को ऑनलाइन अग्रसारित करना था लेकिन अब भी कुल 1250 छात्र-छात्राओं के छात्रवृत्ति आवेदन पत्र समाज कल्याण विभाग के पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो रहा है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि आवेदनों का अग्रसारण किया गया है जबकि समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है उनके यहां आवेदन प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं। इसके बाद कांग्रेस नेता विनोद सिंह ने जिलाधिकारी को शिकायती देकर प्रकरण की जांच कराने और पीएन इंटर कॉलेज दुबे छपरा के 1250 छात्र छात्राओं को छात्रवृत्ति की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।

Download Amar Ujala App for Breaking News in Hindi & Live Updates. https://www.amarujala.com/channels/downloads?tm_source=text_share

एसटी एससी छात्रवृत्ति की राशि बढ़ी, चार करोड़ एससी,एसटी के छात्रों को मिलेगा वजीफा

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने बुधवार को राज्य सभा में कहा कि सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति (एससी- एसटी) के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की राशि काफी बढ़ा दी है जिससे अब करीब चार करोड़ छात्र-छात्राओं को वजीफा मिल सकेगा।

कटारिया ने एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि पहले एक ऐसे फामूर्ले के तहत एससी-एसटी के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलती थी जिससे एक हजार करोड़ रुपये ही वजीफे के रूप में उन्हें दिये जा सकते थे, लेकिन अब उस फामूर्ले को बदल दिया गया जिससे इन विद्यार्थियों को बड़ी राशि इस मद में दी जा सकेगी। बढ़ी हुई राशि से अब करीब चार करोड़ विद्यार्थियों को वजीफा दिया जा सकेगा।

उन्होंने एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारतीय प्रबंधन संस्थान में आरक्षित वर्ग के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए प्रयास किए जाएंगे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ा रही है और इनमें आने वाले बुुजुर्गों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि वृद्धाश्रमों में दिन में  आने और रात में अपने घरों को चले जाने वाले बुजुर्गों के लिए भी बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं।

छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सरकारी सुविधा पाने के लिए किए गए आवेदनों में मामूली त्रुटियों की वजह से लम्बित आवेदनों से परेशान अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के गरीब व जरूरतमंद छात्र-छात्राओं के लिए एक उम्मीद भरी खबर है। समाज कल्याण विभाग ने शासन को ऐसे छात्र-छात्राओं के आवेदनों की त्रुटियों को दूर कर उनके आवदेन स्वीकृत करने के लिए 22 मार्च तक जिला स्तरीय छात्रवृत्ति स्वीकृति समिति को मोहलत देने का अनुरोध किया है।

अगर शासन से इस बारे में स्वीकृति मिल जाती है तो जिला स्तरीय छात्रवृत्ति स्वीकृति समिति को डाटा लॉक करने की समय सीमा और मिल जाएगी तब लंबित आवेदनों से संबंधित छात्र-छात्राओं के आवेदनों की मामूली त्रुटियां दूर हो सकेंगी।

वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना होने की वजह से सभी आवेदक छात्र-छात्राओं के बैंक खातों छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की राशि आगामी 25 मार्च तक भेजे जाने की तैयारी है। समाज कल्याण निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार अनुसूचित जाति के कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं और व्यासायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत कुल 6, 09, 684 छात्र-छात्राओं के आवेदन सभी स्तरों के परीक्षण में सही पाए गए हैं जबकि कक्षा नौ और दस के अनुसूचित जाति के कुल 2, 80, 850 छात्र-छात्राओं के आवेदनों को स्वीकृति मिल चुकी है।

आवेदन के साथ मांगी गई सभी जरूरी सूचनाएं और प्रमाण सही ढंग से न दिये जाने की वजह से कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के कुल 2, 53,012 अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के आवेदन फंस गये हैं जबकि कक्षा नौ और दस के अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के खामियों की वजह से फंसे आवेदनों की संख्या 98,972 है। सामान्य वर्ग के कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं और व्यासायिक पाठ्यक्रमों 4,25, 422 छात्र-छात्राओं के आवेदन परीक्षण में सही पाये गए हैं जबकि 1,83,520 छात्र-छात्राओं के आवेदन त्रुटियों की वजह से फंस गये हैं। कक्षा नौ व दस की कक्षाओं के सामान्य वर्ग के 96, 752 छात्र-छात्राओं के आवेदन स्वीकृत हुए हैं और 25, 698 छात्र-छात्राओं के आवेदन लंबित हैं।

छात्रवृत्ति के आवेदन स्वीकृत न होने की वजह

-55 प्रतिशत से कम उपस्थिति
-आय प्रमाण पत्र संदिग्ध

-जाति का गलत अंकन
-उपस्थिति कम, प्राप्तांक कम

-आधार का सत्यापन नहीं

खामियों की वजह से निरस्त हुए आवेदन:

-नैक व एनबीए ग्रेडिंग न होने तथा प्रमाण पत्र सत्यापित न होने व अन्य खामियां
-एस.सी.पोस्ट मैट्रिक-81,882

-एस.सी.प्री मैट्रिक-5,748
-जनरल पोस्ट मैट्रिक-30,883

-जनरल प्री मैट्रिक-3, 578

 

शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए 17 मार्च तक जमा करनी होगी हार्डकॉपी, यूपी में Fee Reimbursement के लिए फॉलो करने होंगे ये दिशा निर्देश

समाज कल्याण विभाग की ओर से मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए विद्यार्थियों को संस्थानों में आवेदन की हार्डकॉपी 17 मार्च तक करना है। यह व्यवस्था उन्हीं विद्यार्थियों के लिए दी गई है जो चार से आठ मार्च के बीच आवेदन किए हैं।

लखनऊ, जेएनएन। समाज कल्याण विभाग की ओर से मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए विद्यार्थियों को संस्थानों में आवेदन की  हार्डकॉपी 17 मार्च तक करना है। यह व्यवस्था उन्हीं विद्यार्थियों के लिए दी गई है जो चार से आठ मार्च के बीच आवेदन किए हैं। पहले आवदेन करने वालों को यह मौका नहीं मिलेगा, क्योंकि उनको हार्ड कॉपी जमा करने का मौका पहले ही दिया जा चुका है। समाज कल्याण विभाग की ओर से हाईस्कूल से लेकर पीएचडी तक विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में फीस दी जाती है।

दशमोत्तर छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के का मास्टर डाटा बेस करने, सत्यापन, लॉक करने व छात्रों को छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति आवेदन की संशोधित समय सारिणी के समापन के साथ ही अब भुगतान की प्रक्रिया शुरू होगी। विद्यार्थियों की ओर किए गए ऑनलाइन आवेदन में अब किसी प्रकार का संशोधन नहीं होगा। नवीनीकरण कराने वाले विद्यार्थियों को पहले ही 14 जनवरी तक त्रुटियों को सही कराने का मौका दिया जा चुका है। जिला स्तर के अधिकारी सत्यापन कर चुके हैं और एनआइसी की राज्य इकाई द्वारा परीक्षण भी पूरा किया जा चुका है। जनपदीय छात्रवृत्ति स्वीकृत समिति द्वारा शुद्ध डाटा के संबंध स्वीकृत व निरस्त करने का निर्णय लिया जाएगा। संशोधित सूची के बाद शुल्क प्रतिपूर्ति के भुगतान की प्रक्रिया शुरू होगी। 60 लाख से अधिक विद्यार्थियों को हर साल शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिया जाता है।

प्रदेश सरकार की छात्रवृत्ति के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों ने फॉर्म भरा हैं। इसमें 75 प्रतिशत की उपस्थिति, आय और जाति प्रमाण पत्र वेबसाइट पर अपलोड होना जरुरी है। इसके अलावा हाईस्कूल के अंक प्रमाण पत्र में दर्ज नाम, पिता के नाम के स्पेलिंग में भिन्नता नहीं हो। निदेशालय स्तर पर मास्टर डाटा तैयार करने के दौरान मामला पकड़ में आया। इसके बाद निदेशक की ओर से 1,947 विद्यार्थियों के नामों की सूची को जिले के लॉगिन आईडी पर भेजा गया है। सीडीओ चंद्रशेखर शुक्ल के निर्देश पर पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ने डीआईओएस को पत्र भेजा है। उन्होंने पात्रता की जांच कर कार्यालय में सूची उपलब्ध कराने के निर्देेश दिए हैं। दरअसल, इन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति मिलने की उम्मीद कम हो गई है। पात्रता की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेेगी। संवाद

कोरोना काल में भले ही कई महीनों तक जिले में स्कूल-कालेज बंद रहे हो लेकिन दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए 75 फीसद हाजिरी होना अनिवार्य है। इसी के चलते करीब 23 हजार छात्रों की छात्रवृत्ति पर तलवार लटक गई है।

 

अलगीढ़, सुरजीत पुंढीर। कोरोना काल में भले ही कई महीनों तक जिले में स्कूल-कालेज बंद रहे हो, लेकिन दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए 75 फीसद हाजिरी होना अनिवार्य है। इसी के चलते करीब 23 हजार छात्रों की छात्रवृत्ति पर तलवार लटक गई है। एनआइसी साफ्टवेयर ने कम हाजिरी के चलते इन छात्र-छात्राओं के छात्रवृत्ति फार्म को संदिग्ध मानते हुए वापस कर दिया है। इन सभी के जांच के आदेश दिए गए हैं। इससे छात्रों में खलबली मच गई है। आनलाइन कक्षाओं की हाजिरी को मिलाकर भी 75 फीसद नहीं बैठ रही हैं। ऐसे में इन्हें डर है कि इनकी छात्रवृत्ति भी कोरोना की भेंट न चढ़ जाएं।

यह है योजना
दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत समाज कल्याण विभाग हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक, तकनीकी शिक्षण प्रशिक्षण सहित विभिन्न कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति देता है। इसके लिए सभी स्कूल, कलेजों और इंस्टीट्यूट से छात्रों के आवेदन मांगे जाते हैं। शासन स्तर से इस बार नियम तय कर दिया गया है। इसके तहत संबंधित कालेज के छात्रों की 75 फीसदी उपस्थिति का प्रमाणपत्र देना अनिवार्य है। विभाग इस डाटा को निदेशालय भेजता है। वहीं से छात्रवृत्ति की धनराशि छात्र के खाते में भेजी जाती है। इस बार भी जिले में अब तक करीब 25 हजार फार्म आनलाइन हुए हैं। इनमें अल्पसंख्यक समाज के साढ़े चार हजार, पिछड़ा वर्ग के 12 हजार, अनुसूचित जाति के पांच हजार व सामान्य वर्ग के सात हजार फार्म शामिल हैं। आवेदन आनलाइन होने के बाद यह फार्म कालेजों के पास पहुंचे। वहां से इन्हें शासन स्तर पर भेज दिया गया है।
कोरोना ने कर दी हाजिरी कम

कालेजों के बाद विभागीय साफ्टवेयर पर एनआइसी की टीम ने इन फार्म की जांच की। इसमें सामने आया कि 23 हजार से अधिक फार्म संदिग्ध हैं। इनमें आवेदकों की हाजिरी 75 फीसद से कम है। विभाग ने संदिग्ध फार्म के डाटा को कालेजों के पास वापस भेजा। वहां से जानकारी हुई कि इस बार कोरोना के चलते शैक्षिक सत्र में कई महीने कालेज बंद रहे हैं। ऐसे में छात्रों का औसतन हाजिरी 75 फीसद से कम हैं, लेकिन साफ्टवेयर कम हाजिरी वाले छात्रों का डाटा ही नहीं ले रहा है। ऐसे में इनकी छात्रवृत्ति फंस गई है।
डीएम ने भेजा पत्र : अब छात्रों को परेशानियों को देखते हुए पिछले दिनों डीएम की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाई गई है। इसमें तय हुआ कि पूरे साल की औसतन हाजिरी की जगह कालेजों के खुलने के दिनों का 75 फीसद देखा जाएगा। अब इसको लेकर डीएम ने एक शासन को पत्र भी दिया है। इसमें छात्रों के हित में इस संशोधन को लागू कराने की मांग की है।
अब छात्रवृत्ति के लिए 75 फीसद हाजिरी होना अनिवार्य है, लेकिन कोरोना के चलते कालेजों के पास छात्रों की उपस्थिति का कोई रिकार्ड नहीं है। एेसे में डीएम की तरफ से छात्र हित में कालेज खुलने के बाद से औसतन 75 फीसद हाजिरी का नियम करने की मांग गई है। अगर नियम मान्या होता है, तभी छात्रों को छात्रवृत्ति मिलेगी।
मनीष कुमार , प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share करो